माताजी! कुछ लोगोंका कहना है कि स्वर्ग और नरक तो इसी लोकमें हैं, क्योंकि जो नारकी यातनाएँ हैं, वे यहाँ भी देखी जाती हैं॥ २९॥
अत्रैव नरकः स्वर्ग इति मातः प्रचक्षते।
या यातना वै नारक्यस्ता इहाप्युपलक्षिताः॥ २९
माताजी! कुछ लोगोंका कहना है कि स्वर्ग और नरक तो इसी लोकमें हैं, क्योंकि जो नारकी यातनाएँ हैं, वे यहाँ भी देखी जाती हैं॥ २९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.30.29 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 388) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/3/30/29/