इसलिये माताजी! अब तुम भी अत्यन्त भक्तिभावसे उन श्रीहरिकी ही चरण-शरणमें जाओ; समस्त प्राणियोंका हृदयकमल ही उनका मन्दिर है और तुमने भी मुझसे उनका प्रभाव सुन ही लिया है॥ ११॥✎ 345346
अथ तं सर्वभूतानां हृत्पद्मेषु कृतालयम्।
श्रुतानुभावं शरणं व्रज भावेन भामिनि॥ ११
इसलिये माताजी! अब तुम भी अत्यन्त भक्तिभावसे उन श्रीहरिकी ही चरण-शरणमें जाओ; समस्त प्राणियोंका हृदयकमल ही उनका मन्दिर है और तुमने भी मुझसे उनका प्रभाव सुन ही लिया है॥ ११॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.32.11 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 396) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/3/32/11/
टिप्पणियाँ
३
प्रा० पा०—भाविनि।
(मुद्रित पृष्ठ 396)
इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
#345 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् में → भगवान्में