जिस समय प्रलयकालमें शेषशायी भगवान् शेषशय्यापर शयन करते हैं, उस समय सकाम गृहस्थाश्रमियोंको प्राप्त होनेवाले ये सब लोक भी लीन हो जाते हैं॥ ४॥
यदा चाहीन्द्रशय्यायां शेतेऽनन्तासनो हरिः।
तदा लोका लयं यान्ति त एते गृहमेधिनाम्॥ ४
जिस समय प्रलयकालमें शेषशायी भगवान् शेषशय्यापर शयन करते हैं, उस समय सकाम गृहस्थाश्रमियोंको प्राप्त होनेवाले ये सब लोक भी लीन हो जाते हैं॥ ४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.32.4 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 396) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/3/32/4/