श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.4.24

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

स तं महाभागवतं व्रजन्तं कौरवर्षभः।

विश्रम्भादभ्यधत्तेदं मुख्यं कृष्णपरिग्रहे॥ २४

sa taṃ mahābhāgavataṃ vrajantaṃ kauravarṣabhaḥ|

viśrambhādabhyadhattedaṃ mukhyaṃ kṛṣṇaparigrahe|| 24

अर्थ

जब भगवान् श्रीकृष्णके परिकरोंमें प्रधान महाभागवत उद्धवजी बदरिकाश्रमकी ओर जाने लगे, तब कुरुश्रेष्ठ विदुरजीने श्रद्धापूर्वक उनसे पूछा॥ २४॥

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें