श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.4.26

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

उद्धव उवाच

ननु ते तत्त्वसंराध्य ऋषिः कौषारवोऽन्ति मे।

साक्षाद्भगवताऽऽदिष्टो मर्त्यलोकं जिहासता॥ २६

nanu te tattvasaṃrādhya ṛṣiḥ kauṣāravo'nti me|

sākṣādbhagavatā''diṣṭo martyalokaṃ jihāsatā|| 26

अर्थ

उद्धवजीने कहा—उस तत्त्वज्ञानके लिये आपको मुनिवर मैत्रेयजीकी सेवा करनी चाहिये। इस मर्त्यलोकको छोड़ते समय मेरे सामने स्वयं भगवान्‌ने ही आपको उपदेश करनेके लिये उन्हें आज्ञा दी थी॥ २६॥ ✎ 207

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #207 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने

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