राजा परीक्षित्ने पूछा—भगवन्! वृष्णिकुल और भोजवंशके सभी रथी और यूथपतियोंके भी यूथपति नष्ट हो गये थे। यहाँतक कि त्रिलोकीनाथ श्रीहरिको भी अपना वह रूप छोड़ना पड़ा था। फिर उन सबके मुखिया उद्धवजी ही कैसे बच रहे?॥ २८॥
निधनमुपगतेषु वृष्णिभोजे-
ष्वधिरथयूथपयूथपेषु मुख्यः।
स तु कथमवशिष्ट उद्धवो य-
द्धरिरपि तत्यज आकृतिं त्र्यधीशः॥ २८
राजा परीक्षित्ने पूछा—भगवन्! वृष्णिकुल और भोजवंशके सभी रथी और यूथपतियोंके भी यूथपति नष्ट हो गये थे। यहाँतक कि त्रिलोकीनाथ श्रीहरिको भी अपना वह रूप छोड़ना पड़ा था। फिर उन सबके मुखिया उद्धवजी ही कैसे बच रहे?॥ २८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.4.28 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 252) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/3/4/28/