yo jātastrāyate varṇān pauruṣaḥ kaṇṭakakṣatāt|| 31
अर्थ
उनकी भुजाओंसे क्षत्रियवृत्ति और उसका अवलम्बन करनेवाला क्षत्रिय वर्ण उत्पन्न हुआ, जो विराट् भगवान्का अंश होनेके कारण जन्म लेकर सब वर्णोंकी चोर आदिके उपद्रवोंसे रक्षा करता है॥ ३१॥✎ 221
बाहुभ्योऽवर्तत क्षत्रं क्षत्रियस्तदनुव्रतः।
यो जातस्त्रायते वर्णान् पौरुषः कण्टकक्षतात्॥ ३१
उनकी भुजाओंसे क्षत्रियवृत्ति और उसका अवलम्बन करनेवाला क्षत्रिय वर्ण उत्पन्न हुआ, जो विराट् भगवान्का अंश होनेके कारण जन्म लेकर सब वर्णोंकी चोर आदिके उपद्रवोंसे रक्षा करता है॥ ३१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.6.31 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 261) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/3/6/31/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)