इस प्रकार जब भगवान्ने अदृष्टको कार्योन्मुख किया, तब उस तेईस तत्त्वोंके समूहने भगवान्की प्रेरणासे अपने अंशोंद्वारा अधिपुरुष—विराट्को उत्पन्न किया॥ ४॥✎ 21621721821913001301
प्रबुद्धकर्मा दैवेन त्रयोविंशतिको गणः।
प्रेरितोऽजनयत्स्वाभिर्मात्राभिरधिपूरुषम्॥ ४
इस प्रकार जब भगवान्ने अदृष्टको कार्योन्मुख किया, तब उस तेईस तत्त्वोंके समूहने भगवान्की प्रेरणासे अपने अंशोंद्वारा अधिपुरुष—विराट्को उत्पन्न किया॥ ४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.6.4 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 259) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/3/6/4/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (6)