निष्पाप मैत्रेयजी! धर्मके मूल कारण श्रीजनार्दनभगवान् किस आचरणसे सन्तुष्ट होते हैं और किनपर अनुग्रह करते हैं, यह वर्णन कीजिये॥ ३५॥
येन वा भगवांस्तुष्येद्धर्मयोनिर्जनार्दनः।
सम्प्रसीदति वा येषामेतदाख्याहि चानघ॥ ३५
निष्पाप मैत्रेयजी! धर्मके मूल कारण श्रीजनार्दनभगवान् किस आचरणसे सन्तुष्ट होते हैं और किनपर अनुग्रह करते हैं, यह वर्णन कीजिये॥ ३५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.7.35 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 266) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/3/7/35/