श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.7.4

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

अस्राक्षीद्भगवान् विश्‍वं गुणमय्याऽऽत्ममायया।

तया संस्थापयत्येतद‍्भूयः प्रत्यपिधास्यति॥ ४

asrākṣīdbhagavān viśvaṃ guṇamayyā''tmamāyayā|

tayā saṃsthāpayatyetadbhūyaḥ pratyapidhāsyati|| 4

अर्थ

भगवान्‌ने अपनी गुणमयी मायासे जगत‍्की रचना की है, उसीसे वे इसका पालन करते हैं और फिर उसीसे संहार भी करेंगे॥ ४॥✎ 226

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #226 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने

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