श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.8.22

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

कालेन सोऽजः पुरुषायुषाभि-

प्रवृत्तयोगेन विरूढबोधः।

स्वयं तदन्तर्हृदयेऽवभात-

मपश्यतापश्यत यन्‍न पूर्वम्॥ २२

kālena so'jaḥ puruṣāyuṣābhi-

pravṛttayogena virūḍhabodhaḥ|

svayaṃ tadantarhṛdaye'vabhāta-

mapaśyatāpaśyata yanna pūrvam|| 22

अर्थ

इस प्रकार पुरुषकी पूर्ण आयुके बराबर कालतक (अर्थात् दिव्य सौ वर्षतक) अच्छी तरह योगाभ्यास करनेपर ब्रह्माजीको ज्ञान प्राप्त हुआ; तब उन्होंने अपने उस अधिष्ठानको, जिसे वे पहले खोजनेपर भी नहीं देख पाये थे, अपने ही अन्तःकरणमें प्रकाशित होते देखा॥ २२॥

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