श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.9.38

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 9 · अथ नवमोऽध्यायः

यच्चकर्थाङ्ग मत्स्तोत्रं मत्कथाभ्युदयाङ्कितम्।

यद्वा तपसि ते निष्ठा स एष मदनुग्रहः॥ ३८

yaccakarthāṅga matstotraṃ matkathābhyudayāṅkitam|

yadvā tapasi te niṣṭhā sa eṣa madanugrahaḥ|| 38

अर्थ

प्यारे ब्रह्माजी! तुमने जो मेरी कथाओंके वैभवसे युक्त मेरी स्तुति की है और तपस्यामें जो तुम्हारी निष्ठा है, वह भी मेरी ही कृपाका फल है॥ ३८॥

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