श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.1.22

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

अप्सरोमुनिगन्धर्वसिद्धविद्याधरोरगैः ।

वितायमानयशसस्तदाश्रमपदं ययुः॥ २२

apsaromunigandharvasiddhavidyādharoragaiḥ |

vitāyamānayaśasastadāśramapadaṃ yayuḥ|| 22

अर्थ

तब यह देखकर कि प्राणायामरूपी ईंधनसे प्रज्वलित हुआ अत्रि मुनिका तेज उनके मस्तकसे निकलकर तीनों लोकोंको तपा रहा है—ब्रह्मा, विष्णु और महादेव—तीनों जगत्पति उनके आश्रमपर आये। उस समय अप्सरा, मुनि, गन्धर्व, सिद्ध, विद्याधर और नाग—उनका सुयश गा रहे थे॥ २१-२२॥

यह अर्थ श्लोक 21–22 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

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