श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.1.34

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

श्रद्धा त्वङ्गिरसः पत्‍नी चतस्रोऽसूत कन्यकाः।

सिनीवाली कुहू राका चतुर्थ्यनुमतिस्तथा॥ ३४

śraddhā tvaṅgirasaḥ patnī catasro'sūta kanyakāḥ|

sinīvālī kuhū rākā caturthyanumatistathā|| 34

अर्थ

अंगिराकी पत्‍नी श्रद्धाने सिनीवाली, कुहू, राका और अनुमति—इन चार कन्याओंको जन्म दिया॥ ३४॥

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें