॥ श्रीहरिः ॥
पुलस्त्योऽजनयत्पत्न्यामगस्त्यं च हविर्भुवि।
सोऽन्यजन्मनि दह्राग्निर्विश्रवाश्च महातपाः॥ ३६
pulastyo'janayatpatnyāmagastyaṃ ca havirbhuvi|
so'nyajanmani dahrāgnirviśravāśca mahātapāḥ|| 36
अर्थ
पुलस्त्यजीके उनकी पत्नी हविर्भूसे महर्षि अगस्त्य और महातपस्वी विश्रवा—ये दो पुत्र हुए। इनमें अगस्त्यजी दूसरे जन्ममें जठराग्नि हुए॥ ३६॥
पुलस्त्योऽजनयत्पत्न्यामगस्त्यं च हविर्भुवि।
सोऽन्यजन्मनि दह्राग्निर्विश्रवाश्च महातपाः॥ ३६
पुलस्त्यजीके उनकी पत्नी हविर्भूसे महर्षि अगस्त्य और महातपस्वी विश्रवा—ये दो पुत्र हुए। इनमें अगस्त्यजी दूसरे जन्ममें जठराग्नि हुए॥ ३६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.1.36 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 408) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/1/36/