श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.1.36

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

पुलस्त्योऽजनयत्पत्न्यामगस्त्यं च हविर्भुवि।

सोऽन्यजन्मनि दह्राग्‍निर्विश्रवाश्‍च महातपाः॥ ३६

pulastyo'janayatpatnyāmagastyaṃ ca havirbhuvi|

so'nyajanmani dahrāgnirviśravāśca mahātapāḥ|| 36

अर्थ

पुलस्त्यजीके उनकी पत्‍नी हविर्भूसे महर्षि अगस्त्य और महातपस्वी विश्रवा—ये दो पुत्र हुए। इनमें अगस्त्यजी दूसरे जन्ममें जठराग्‍नि हुए॥ ३६॥

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