श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.1.38

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

पुलहस्य गतिर्भार्या त्रीनसूत सती सुतान्।

कर्मश्रेष्ठं वरीयांसं सहिष्णुं च महामते॥ ३८

pulahasya gatirbhāryā trīnasūta satī sutān|

karmaśreṣṭhaṃ varīyāṃsaṃ sahiṣṇuṃ ca mahāmate|| 38

अर्थ

महामते! महर्षि पुलहकी स्त्री परम साध्वी गतिसे कर्मश्रेष्ठ, वरीयान् और सहिष्णु—ये तीन पुत्र उत्पन्‍न हुए॥ ३८॥

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