॥ श्रीहरिः ॥
प्रसूतिं मानवीं दक्ष उपयेमे ह्यजात्मजः।
तस्यां ससर्ज दुहितॄः षोडशामललोचनाः॥ ४७ ✎ 1017
prasūtiṃ mānavīṃ dakṣa upayeme hyajātmajaḥ|
tasyāṃ sasarja duhitṝḥ ṣoḍaśāmalalocanāḥ|| 47
अर्थ
ब्रह्माजीके पुत्र दक्षप्रजापतिने मनुनन्दिनी प्रसूतिसे विवाह किया। उससे उन्होंने सुन्दर नेत्रोंवाली सोलह कन्याएँ उत्पन्न कीं॥ ४७॥
प्रसूतिं मानवीं दक्ष उपयेमे ह्यजात्मजः।
तस्यां ससर्ज दुहितॄः षोडशामललोचनाः॥ ४७
ब्रह्माजीके पुत्र दक्षप्रजापतिने मनुनन्दिनी प्रसूतिसे विवाह किया। उससे उन्होंने सुन्दर नेत्रोंवाली सोलह कन्याएँ उत्पन्न कीं॥ ४७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.1.47 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 409) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/1/47/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
- #1017 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): दुहितृ: → दुहितॄः