श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.1.49

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

श्रद्धा मैत्री दया शान्तिस्तुष्टिः पुष्टिः क्रियोन्‍नतिः।

बुद्धिर्मेधा तितिक्षा ह्रीर्मूर्तिर्धर्मस्य पत्नयः॥ ४९

śraddhā maitrī dayā śāntistuṣṭiḥ puṣṭiḥ kriyonnatiḥ|

buddhirmedhā titikṣā hrīrmūrtirdharmasya patnayaḥ|| 49

अर्थ

श्रद्धा, मैत्री, दया, शान्ति, तुष्टि, पुष्टि, क्रिया, उन्‍नति, बुद्धि, मेधा, तितिक्षा, ह्री और मूर्ति—ये धर्मकी पत्नियाँ हैं॥ ४९॥

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