जब दक्षिणा विवाहके योग्य हुई तो उसने यज्ञभगवान्को ही पतिरूपमें प्राप्त करनेकी इच्छा की, तब भगवान् यज्ञपुरुषने उससे विवाह किया। इससे दक्षिणाको बड़ा सन्तोष हुआ। भगवान्ने प्रसन्न होकर उससे बारह पुत्र उत्पन्न किये॥ ६॥✎ 353354355
तां कामयानां भगवानुवाह यजुषां पतिः।
तुष्टायां तोषमापन्नोऽजनयद् द्वादशात्मजान्॥ ६
जब दक्षिणा विवाहके योग्य हुई तो उसने यज्ञभगवान्को ही पतिरूपमें प्राप्त करनेकी इच्छा की, तब भगवान् यज्ञपुरुषने उससे विवाह किया। इससे दक्षिणाको बड़ा सन्तोष हुआ। भगवान्ने प्रसन्न होकर उससे बारह पुत्र उत्पन्न किये॥ ६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.1.6 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 405) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/1/6/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)