क्योंकि सतीके पिता दक्षने बिना ही किसी अपराधके भगवान् शिवजीके प्रतिकूल आचरण किया था, इसलिये सतीने युवावस्थामें ही क्रोधवश योगके द्वारा स्वयं ही अपने शरीरका त्याग कर दिया था॥ ६६॥
पितर्यप्रतिरूपे स्वे भवायानागसे रुषा।
अप्रौढैवात्मनाऽऽत्मानमजहाद्योगसंयुता॥ ६६
क्योंकि सतीके पिता दक्षने बिना ही किसी अपराधके भगवान् शिवजीके प्रतिकूल आचरण किया था, इसलिये सतीने युवावस्थामें ही क्रोधवश योगके द्वारा स्वयं ही अपने शरीरका त्याग कर दिया था॥ ६६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.1.66 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 411) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/1/66/