श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.10.13

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

औत्तानपादिः स तदा शस्त्रवर्षेण भूरिणा।

न उपादृश्यतच्छन्‍न आसारेण यथा गिरिः॥ १३

auttānapādiḥ sa tadā śastravarṣeṇa bhūriṇā|

na upādṛśyatacchanna āsāreṇa yathā giriḥ|| 13

अर्थ

इस भीषण शस्त्रवर्षासे ध्रुवजी बिलकुल ढक गये। तब लोगोंको उनका दीखना वैसे ही बंद हो गया, जैसे भारी वर्षासे पर्वतका॥ १३॥

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें