प्रलयकालके समान भयंकर समुद्र अपनी उत्ताल तरंगोंसे पृथ्वीको सब ओरसे डुबाता हुआ बड़ी भीषण गर्जनाके साथ उनकी ओर बढ़ रहा है॥ २७॥
समुद्र ऊर्मिभिर्भीमः प्लावयन् सर्वतो भुवम्।
आससाद महाह्रादः कल्पान्त इव भीषणः॥ २७
प्रलयकालके समान भयंकर समुद्र अपनी उत्ताल तरंगोंसे पृथ्वीको सब ओरसे डुबाता हुआ बड़ी भीषण गर्जनाके साथ उनकी ओर बढ़ रहा है॥ २७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.10.27 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 463) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/10/27/