॥ श्रीहरिः ॥
ततो निष्क्रम्य बलिन उपदेवमहाभटाः।
असहन्तस्तन्निनादमभिपेतुरुदायुधाः ॥ ७
tato niṣkramya balina upadevamahābhaṭāḥ|
asahantastanninādamabhipeturudāyudhāḥ || 7
अर्थ
वीरवर विदुरजी! महाबलवान् यक्षवीरोंको वह शंखनाद सहन न हुआ। इसलिये वे तरह-तरहके अस्त्र-शस्त्र लेकर नगरके बाहर निकल आये और ध्रुवपर टूट पड़े॥ ७॥
ततो निष्क्रम्य बलिन उपदेवमहाभटाः।
असहन्तस्तन्निनादमभिपेतुरुदायुधाः ॥ ७
वीरवर विदुरजी! महाबलवान् यक्षवीरोंको वह शंखनाद सहन न हुआ। इसलिये वे तरह-तरहके अस्त्र-शस्त्र लेकर नगरके बाहर निकल आये और ध्रुवपर टूट पड़े॥ ७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.10.7 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 461) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/10/7/