श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.11.34

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

तं प्रसादय वत्साशु सन्‍नत्या प्रश्रयोक्तिभिः।

न यावन्महतां तेजः कुलं नोऽभिभविष्यति॥ ३४

taṃ prasādaya vatsāśu sannatyā praśrayoktibhiḥ|

na yāvanmahatāṃ tejaḥ kulaṃ no'bhibhaviṣyati|| 34

अर्थ

इसलिये बेटा! जबतक कि महापुरुषोंका तेज हमारे कुलको आक्रान्त नहीं कर लेता; इसके पहले ही विनम्र भाषण और विनयके द्वारा शीघ्र उन्हें प्रसन्‍न कर लो॥ ३४॥

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