॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 4.12.20
तत्रानु देवप्रवरौ चतुर्भुजौ
श्यामौ किशोरावरुणाम्बुजेक्षणौ।
स्थिताववष्टभ्य गदां सुवाससौ
किरीटहारांगदचारुकुण्डलौ ॥ २०
tatrānu devapravarau caturbhujau
śyāmau kiśorāvaruṇāmbujekṣaṇau|
sthitāvavaṣṭabhya gadāṃ suvāsasau
kirīṭahārāṃgadacārukuṇḍalau || 20
अर्थ
उसमें दो श्रेष्ठ पार्षद गदाओंका सहारा लिये खड़े थे। उनके चार भुजाएँ थीं, सुन्दर श्याम शरीर था, किशोर अवस्था थी और अरुण कमलके समान नेत्र थे। वे सुन्दर वस्त्र, किरीट, हार, भुजबन्ध और अति मनोहर कुण्डल धारण किये हुए थे॥ २०॥