श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.12.20

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 12 · अथ द्वादशोऽध्यायः

तत्रानु देवप्रवरौ चतुर्भुजौ

श्यामौ किशोरावरुणाम्बुजेक्षणौ।

स्थिताववष्टभ्य गदां सुवाससौ

किरीटहारांगदचारुकुण्डलौ ॥ २०

tatrānu devapravarau caturbhujau

śyāmau kiśorāvaruṇāmbujekṣaṇau|

sthitāvavaṣṭabhya gadāṃ suvāsasau

kirīṭahārāṃgadacārukuṇḍalau || 20

अर्थ

उसमें दो श्रेष्ठ पार्षद गदाओंका सहारा लिये खड़े थे। उनके चार भुजाएँ थीं, सुन्दर श्याम शरीर था, किशोर अवस्था थी और अरुण कमलके समान नेत्र थे। वे सुन्दर वस्त्र, किरीट, हार, भुजबन्ध और अति मनोहर कुण्डल धारण किये हुए थे॥ २०॥

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