वास्तवमें न तुमने यक्षोंको मारा है और न यक्षोंने तुम्हारे भाईको। समस्त जीवोंकी उत्पत्ति और विनाशका कारण तो एकमात्र काल ही है॥ ३॥
न भवानवधीद्यक्षान्न यक्षा भ्रातरं तव।
काल एव हि भूतानां प्रभुरप्ययभावयोः॥ ३
वास्तवमें न तुमने यक्षोंको मारा है और न यक्षोंने तुम्हारे भाईको। समस्त जीवोंकी उत्पत्ति और विनाशका कारण तो एकमात्र काल ही है॥ ३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.12.3 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 468) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/12/3/