उस समय आकाशमें दुन्दुभि, मृदंग और ढोल आदि बाजे बजने लगे, श्रेष्ठ गन्धर्व गान करने लगे और फूलोंकी वर्षा होने लगी॥ ३१॥
तदा दुन्दुभयो नेदुर्मृदंगपणवादयः।
गन्धर्वमुख्याः प्रजगुः पेतुः कुसुमवृष्टयः॥ ३१
उस समय आकाशमें दुन्दुभि, मृदंग और ढोल आदि बाजे बजने लगे, श्रेष्ठ गन्धर्व गान करने लगे और फूलोंकी वर्षा होने लगी॥ ३१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.12.31 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 471) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/12/31/