श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.12.9

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 12 · अथ द्वादशोऽध्यायः

तस्य प्रीतेन मनसा तां दत्त्वैडविडस्ततः।

पश्यतोऽन्तर्दधे सोऽपि स्वपुरं प्रत्यपद्यत॥ ९

tasya prītena manasā tāṃ dattvaiḍaviḍastataḥ|

paśyato'ntardadhe so'pi svapuraṃ pratyapadyata|| 9

अर्थ

इडविडाके पुत्र कुबेरजीने बड़े प्रसन्‍न मनसे उन्हें भगवत्स्मृति प्रदान की। फिर उनके देखते-ही-देखते वे अन्तर्धान हो गये। इसके पश्चात् ध्रुवजी भी अपनी राजधानीको लौट आये॥ ९॥

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