॥ श्रीहरिः ॥
प्रदोषो निशिथो व्युष्ट इति दोषासुतास्त्रयः।
व्युष्टः सुतं पुष्करिण्यां सर्वतेजसमादधे॥ १४
pradoṣo niśitho vyuṣṭa iti doṣāsutāstrayaḥ|
vyuṣṭaḥ sutaṃ puṣkariṇyāṃ sarvatejasamādadhe|| 14
अर्थ
दोषाके प्रदोष, निशीथ और व्युष्ट—ये तीन पुत्र हुए। व्युष्टने अपनी भार्या पुष्करिणीसे सर्वतेजा नामका पुत्र उत्पन्न किया॥ १४॥
प्रदोषो निशिथो व्युष्ट इति दोषासुतास्त्रयः।
व्युष्टः सुतं पुष्करिण्यां सर्वतेजसमादधे॥ १४
दोषाके प्रदोष, निशीथ और व्युष्ट—ये तीन पुत्र हुए। व्युष्टने अपनी भार्या पुष्करिणीसे सर्वतेजा नामका पुत्र उत्पन्न किया॥ १४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.13.14 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 474) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/13/14/