श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.13.18

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

सुनीथांगस्य या पत्‍नी सुषुवे वेनमुल्बणम्।

यद्दौःशील्यात्स राजर्षिर्निर्विण्णो निरगात्पुरात्॥ १८

sunīthāṃgasya yā patnī suṣuve venamulbaṇam|

yaddauḥśīlyātsa rājarṣirnirviṇṇo niragātpurāt|| 18

अर्थ

अंगकी पत्‍नी सुनीथाने क्रूरकर्मा वेनको जन्म दिया, जिसकी दुष्टतासे उद्विग्न होकर राजर्षि अंग नगर छोड़कर चले गये थे॥ १८॥

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें