भगवान्के दर्शनसे कृतार्थ नारदजी परम भागवत हैं—ऐसा मैं मानता हूँ। उन्होंने पांचरात्रका निर्माण करके श्रीहरिकी पूजापद्धतिरूप क्रियायोगका उपदेश किया है॥ ३॥✎ 386
मन्ये महाभागवतं नारदं देवदर्शनम्।
येन प्रोक्तः क्रियायोगः परिचर्याविधिर्हरेः॥ ३
भगवान्के दर्शनसे कृतार्थ नारदजी परम भागवत हैं—ऐसा मैं मानता हूँ। उन्होंने पांचरात्रका निर्माण करके श्रीहरिकी पूजापद्धतिरूप क्रियायोगका उपदेश किया है॥ ३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.13.3 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 473) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/13/3/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)