sāntvito yadi no vācaṃ na grahīṣyatyadharmakṛt|| 12
अर्थ
हमने जान-बूझकर दुराचारी वेनको राजा बनाया था। किन्तु यदि समझानेपर भी यह हमारी बात नहीं मानेगा, तो लोकके धिक्कारसे दग्ध हुए इस दुष्टको हम अपने तेजसे भस्म कर देंगे।’ ऐसा विचार करके मुनिलोग वेनके पास गये और अपने क्रोधको छिपाकर उसे प्रिय वचनोंसे समझाते हुए इस प्रकार कहने लगे॥ १२-१३॥✎ 1602
यह अर्थ श्लोक 12–13 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।
तद्विद्वद्भिरसद्वृत्तो वेनोऽस्माभिः कृतो नृपः।
सान्त्वितो यदि नो वाचं न ग्रहीष्यत्यधर्मकृत्॥ १२
हमने जान-बूझकर दुराचारी वेनको राजा बनाया था। किन्तु यदि समझानेपर भी यह हमारी बात नहीं मानेगा, तो लोकके धिक्कारसे दग्ध हुए इस दुष्टको हम अपने तेजसे भस्म कर देंगे।’ ऐसा विचार करके मुनिलोग वेनके पास गये और अपने क्रोधको छिपाकर उसे प्रिय वचनोंसे समझाते हुए इस प्रकार कहने लगे॥ १२-१३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.14.12 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 479) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/14/12/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)