॥ श्रीहरिः ॥
वीर मातरमाहूय सुनीथां ब्रह्मवादिनः।
प्रकृत्यसम्मतं वेनमभ्यषिञ्चन् पतिं भुवः॥ २
vīra mātaramāhūya sunīthāṃ brahmavādinaḥ|
prakṛtyasammataṃ venamabhyaṣiñcan patiṃ bhuvaḥ|| 2
अर्थ
तब उन्होंने माता सुनीथाकी सम्मतिसे, मन्त्रियोंके सहमत न होनेपर भी वेनको भूमण्डलके राजपदपर अभिषिक्त कर दिया॥ २॥
वीर मातरमाहूय सुनीथां ब्रह्मवादिनः।
प्रकृत्यसम्मतं वेनमभ्यषिञ्चन् पतिं भुवः॥ २
तब उन्होंने माता सुनीथाकी सम्मतिसे, मन्त्रियोंके सहमत न होनेपर भी वेनको भूमण्डलके राजपदपर अभिषिक्त कर दिया॥ २॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.14.2 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 478) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/14/2/