फिर राजर्षि अंगका वंश भी नष्ट नहीं होना चाहिये, क्योंकि इसमें अनेक अमोघ-शक्ति और भगवत्परायण राजा हो चुके हैं’॥ ४२॥
नाङ्गस्य वंशो राजर्षेरेष संस्थातुमर्हति।
अमोघवीर्या हि नृपा वंशेऽस्मिन् केशवाश्रयाः॥ ४२
फिर राजर्षि अंगका वंश भी नष्ट नहीं होना चाहिये, क्योंकि इसमें अनेक अमोघ-शक्ति और भगवत्परायण राजा हो चुके हैं’॥ ४२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.14.42 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 482) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/14/42/