॥ श्रीहरिः ॥
अथ पञ्चदशोऽध्यायः
महाराज पृथुका आविर्भाव और राज्याभिषेक
मैत्रेय उवाच
अथ तस्य पुनर्विप्रैरपुत्रस्य महीपतेः।
बाहुभ्यां मथ्यमानाभ्यां मिथुनं समपद्यत॥ १
atha tasya punarviprairaputrasya mahīpateḥ|
bāhubhyāṃ mathyamānābhyāṃ mithunaṃ samapadyata|| 1
अर्थ
श्रीमैत्रेयजी कहते हैं—विदुरजी! इसके बाद ब्राह्मणोंने पुत्रहीन राजा वेनकी भुजाओंका मन्थन किया, तब उनसे एक स्त्री-पुरुषका जोड़ा प्रकट हुआ॥ १॥
अथ तस्य पुनर्विप्रैरपुत्रस्य महीपतेः।
बाहुभ्यां मथ्यमानाभ्यां मिथुनं समपद्यत॥ १
श्रीमैत्रेयजी कहते हैं—विदुरजी! इसके बाद ब्राह्मणोंने पुत्रहीन राजा वेनकी भुजाओंका मन्थन किया, तब उनसे एक स्त्री-पुरुषका जोड़ा प्रकट हुआ॥ १॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.15.1 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 482) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/15/1/