॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 4.15.12
सरित्समुद्रा गिरयो नागा गावः खगा मृगाः।
द्यौः क्षितिः सर्वभूतानि समाजह्रुरुपायनम्॥ १२
saritsamudrā girayo nāgā gāvaḥ khagā mṛgāḥ|
dyauḥ kṣitiḥ sarvabhūtāni samājahrurupāyanam|| 12
अर्थ
उस समय नदी, समुद्र, पर्वत, सर्प, गौ, पक्षी, मृग, स्वर्ग, पृथ्वी तथा अन्य सब प्राणियोंने भी उन्हें तरह-तरहके उपहार भेंट किये॥ १२॥