वीर विदुरजी! उन्हें कुबेरने बड़ा ही सुन्दर सोनेका सिंहासन दिया तथा वरुणने चन्द्रमाके समान श्वेत और प्रकाशमय छत्र दिया, जिससे निरन्तर जलकी फुहियाँ झरती रहती थीं॥ १४॥✎ 391
तस्मै जहार धनदो हैमं वीर वरासनम्।
वरुणः सलिलस्रावमातपत्रं शशिप्रभम्॥ १४
वीर विदुरजी! उन्हें कुबेरने बड़ा ही सुन्दर सोनेका सिंहासन दिया तथा वरुणने चन्द्रमाके समान श्वेत और प्रकाशमय छत्र दिया, जिससे निरन्तर जलकी फुहियाँ झरती रहती थीं॥ १४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.15.14 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 484) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/15/14/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#391 शब्दोंके बीचका स्थान: विष्णुभगवान् ने → विष्णुभगवान्ने