ऋषियोंने कहा—यह पुरुष भगवान् विष्णुकी विश्वपालिनी कलासे प्रकट हुआ है और यह स्त्री उन परम पुरुषकी अनपायिनी (कभी अलग न होनेवाली) शक्ति लक्ष्मीजीका अवतार है॥ ३॥✎ 3901997
एष विष्णोर्भगवतः कला भुवनपालिनी।
इयं च लक्ष्म्याः सम्भूतिः पुरुषस्यानपायिनी॥ ३
ऋषियोंने कहा—यह पुरुष भगवान् विष्णुकी विश्वपालिनी कलासे प्रकट हुआ है और यह स्त्री उन परम पुरुषकी अनपायिनी (कभी अलग न होनेवाली) शक्ति लक्ष्मीजीका अवतार है॥ ३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.15.3 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 483) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/15/3/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)