भगवान् सूर्य मानसोत्तर पर्वततक जितने प्रदेशको अपनी किरणोंसे प्रकाशित करते हैं, उस सम्पूर्ण क्षेत्रमें इनका निष्कण्टक राज्य रहेगा॥ १४॥
अस्याप्रतिहतं चक्रं पृथोरामानसाचलात्।
वर्तते भगवानर्को यावत्तपति गोगणैः॥ १४
भगवान् सूर्य मानसोत्तर पर्वततक जितने प्रदेशको अपनी किरणोंसे प्रकाशित करते हैं, उस सम्पूर्ण क्षेत्रमें इनका निष्कण्टक राज्य रहेगा॥ १४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.16.14 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 487) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/16/14/