‘आप साक्षात् देवप्रवर श्रीनारायण ही हैं’ जो अपनी मायासे अवतीर्ण हुए हैं; हम आपकी महिमाका वर्णन करनेमें समर्थ नहीं हैं। आपने जन्म तो राजा वेनके मृतक शरीरसे लिया है, किन्तु आपके पौरुषोंका वर्णन करनेमें साक्षात् ब्रह्मादिकी बुद्धि भी चकरा जाती है॥ २॥
नालं वयं ते महिमानुवर्णने
यो देववर्योऽवततार मायया।
वेनांगजातस्य च पौरुषाणि ते
वाचस्पतीनामपि बभ्रमुर्धियः॥ २
‘आप साक्षात् देवप्रवर श्रीनारायण ही हैं’ जो अपनी मायासे अवतीर्ण हुए हैं; हम आपकी महिमाका वर्णन करनेमें समर्थ नहीं हैं। आपने जन्म तो राजा वेनके मृतक शरीरसे लिया है, किन्तु आपके पौरुषोंका वर्णन करनेमें साक्षात् ब्रह्मादिकी बुद्धि भी चकरा जाती है॥ २॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.16.2 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 485) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/16/2/