श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.16.20

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 16 · अथ षोडशोऽध्यायः

अयं भुवो मण्डलमोदयाद्रे-

र्गोप्तैकवीरो नरदेवनाथः।

आस्थाय जैत्रं रथमात्तचापः

पर्यस्यते दक्षिणतो यथार्कः॥ २०

ayaṃ bhuvo maṇḍalamodayādre-

rgoptaikavīro naradevanāthaḥ|

āsthāya jaitraṃ rathamāttacāpaḥ

paryasyate dakṣiṇato yathārkaḥ|| 20

अर्थ

ये अद्वितीय वीर और एकच्छत्र सम्राट् होकर अकेले ही उदयाचलपर्यन्त समस्त भूमण्डलकी रक्षा करेंगे तथा अपने जयशील रथपर चढ़कर धनुष हाथमें लिये सूर्यके समान सर्वत्र प्रदक्षिणा करेंगे॥ २०॥

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