॥ श्रीहरिः ॥
आप्याययत्यसौ लोकं वदनामृतमूर्तिना।
सानुरागावलोकेन विशदस्मितचारुणा॥ ९
āpyāyayatyasau lokaṃ vadanāmṛtamūrtinā|
sānurāgāvalokena viśadasmitacāruṇā|| 9
अर्थ
ये अपने अमृतमय मुखचन्द्रकी मनोहर मुसकान और प्रेमभरी चितवनसे सम्पूर्ण लोकोंको आनन्दमग्न कर देंगे॥ ९॥
आप्याययत्यसौ लोकं वदनामृतमूर्तिना।
सानुरागावलोकेन विशदस्मितचारुणा॥ ९
ये अपने अमृतमय मुखचन्द्रकी मनोहर मुसकान और प्रेमभरी चितवनसे सम्पूर्ण लोकोंको आनन्दमग्न कर देंगे॥ ९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.16.9 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 486) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/16/9/