और महाभाग पृथुजीसे कहने लगी—‘धर्मके तत्त्वको जाननेवाले शरणागतवत्सल राजन्! आप तो सभी प्राणियोंकी रक्षा करनेमें तत्पर हैं, आप मेरी भी रक्षा कीजिये॥ १८॥✎ 1329
उवाच च महाभागं धर्मज्ञापन्नवत्सल।
त्राहि मामपि भूतानां पालनेऽवस्थितो भवान्॥ १८
और महाभाग पृथुजीसे कहने लगी—‘धर्मके तत्त्वको जाननेवाले शरणागतवत्सल राजन्! आप तो सभी प्राणियोंकी रक्षा करनेमें तत्पर हैं, आप मेरी भी रक्षा कीजिये॥ १८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.17.18 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 490) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/17/18/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#1329 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): शरणा-गतवत्सल → शरणागतवत्सल