श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.17.2

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 17 · अथ सप्तदशोऽध्यायः

ब्राह्मणप्रमुखान् वर्णान् भृत्यामात्यपुरोधसः।

पौरांजानपदान् श्रेणीः प्रकृतीः समपूजयत्॥ २

brāhmaṇapramukhān varṇān bhṛtyāmātyapurodhasaḥ|

paurāṃjānapadān śreṇīḥ prakṛtīḥ samapūjayat|| 2

अर्थ

उन्होंने ब्राह्मणादि चारों वर्णों, सेवकों, मन्त्रियों, पुरोहितों, पुरवासियों, देशवासियों, भिन्‍न-भिन्‍न व्यवसायियों तथा अन्यान्य आज्ञानुवर्तियोंका भी सत्कार किया॥ २॥✎ 1327

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1327 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): देश-वासियों, → देशवासियों,

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