श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.17.5

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 17 · अथ सप्तदशोऽध्यायः

सनत्कुमाराद्भगवतो ब्रह्मन् ब्रह्मविदुत्तमात्।

लब्ध्वा ज्ञानं सविज्ञानं राजर्षिः कां गतिं गतः॥ ५

sanatkumārādbhagavato brahman brahmaviduttamāt|

labdhvā jñānaṃ savijñānaṃ rājarṣiḥ kāṃ gatiṃ gataḥ|| 5

अर्थ

ब्रह्मज्ञानियोंमें श्रेष्ठ भगवान् सनत्कुमारजीसे ज्ञान और विज्ञान प्राप्त करके वे राजर्षि किस गतिको प्राप्त हुए?॥ ५॥✎ 1328

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1328 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): सनत्कुमार-जीसे → सनत्कुमारजीसे

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