ब्रह्मज्ञानियोंमें श्रेष्ठ भगवान् सनत्कुमारजीसे ज्ञान और विज्ञान प्राप्त करके वे राजर्षि किस गतिको प्राप्त हुए?॥ ५॥✎ 1328
सनत्कुमाराद्भगवतो ब्रह्मन् ब्रह्मविदुत्तमात्।
लब्ध्वा ज्ञानं सविज्ञानं राजर्षिः कां गतिं गतः॥ ५
ब्रह्मज्ञानियोंमें श्रेष्ठ भगवान् सनत्कुमारजीसे ज्ञान और विज्ञान प्राप्त करके वे राजर्षि किस गतिको प्राप्त हुए?॥ ५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.17.5 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 489) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/17/5/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#1328 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): सनत्कुमार-जीसे → सनत्कुमारजीसे