श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.17.8

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 17 · अथ सप्तदशोऽध्यायः

सूत उवाच

चोदितो विदुरेणैवं वासुदेवकथां प्रति।

प्रशस्य तं प्रीतमना मैत्रेयः प्रत्यभाषत॥ ८

codito vidureṇaivaṃ vāsudevakathāṃ prati|

praśasya taṃ prītamanā maitreyaḥ pratyabhāṣata|| 8

अर्थ

श्रीसूतजी कहते हैं—जब विदुरजीने भगवान् वासुदेवकी कथा कहनेके लिये इस प्रकार प्रेरणा की, तब श्रीमैत्रेयजी प्रसन्‍नचित्तसे उनकी प्रशंसा करते हुए कहने लगे॥ ८॥

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें