श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.18.10

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

दोग्धारं च महाबाहो भूतानां भूतभावन।

अन्‍नमीप्सितमूर्जस्वद्भगवान् वाञ्छते यदि॥ १०

dogdhāraṃ ca mahābāho bhūtānāṃ bhūtabhāvana|

annamīpsitamūrjasvadbhagavān vāñchate yadi|| 10

अर्थ

लोकपालक वीर! यदि आपको समस्त प्राणियोंके अभीष्ट एवं बलकी वृद्धि करनेवाले अन्‍नकी आवश्यकता है तो आप मेरे योग्य बछड़ा, दोहनपात्र और दुहनेवालेकी व्यवस्था कीजिये; मैं उस बछड़ेके स्नेहसे पिन्हाकर दूधके रूपमें आपको सभी अभीष्ट वस्तुएँ दे दूँगी॥ ९-१०॥

यह अर्थ श्लोक 9–10 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

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