siddhiṃ nabhasi vidyāṃ ca ye ca vidyādharādayaḥ|| 19
अर्थ
फिर कपिलदेवजीको बछड़ा बनाकर आकाशरूप पात्रमें सिद्धोंने अणिमादि अष्टसिद्धि तथा विद्याधरोंने आकाशगमन आदि विद्याओंको दुहा॥ १९॥✎ 400
प्रकल्प्य वत्सं कपिलं सिद्धाः सङ्कल्पनामयीम्।
सिद्धिं नभसि विद्यां च ये च विद्याधरादयः॥ १९
फिर कपिलदेवजीको बछड़ा बनाकर आकाशरूप पात्रमें सिद्धोंने अणिमादि अष्टसिद्धि तथा विद्याधरोंने आकाशगमन आदि विद्याओंको दुहा॥ १९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.18.19 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 494) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/18/19/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)