श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.18.22

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

तथाहयो दन्दशूकाः सर्पा नागाश्‍च तक्षकम्।

विधाय वत्सं दुदुहुर्बिलपात्रे विषं पयः॥ २२

tathāhayo dandaśūkāḥ sarpā nāgāśca takṣakam|

vidhāya vatsaṃ duduhurbilapātre viṣaṃ payaḥ|| 22

अर्थ

बिना फनवाले साँप, फनवाले साँप, नाग और बिच्छू आदि विषैले जन्तुओंने तक्षकको बछड़ा बनाकर मुखरूप पात्रमें विषरूप दूध दुहा॥ २२॥

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