श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.18.8

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

नूनं ता वीरुधः क्षीणा मयि कालेन भूयसा।

तत्र योगेन४ दृष्टेन भवानादातुमर्हति॥ ८

nūnaṃ tā vīrudhaḥ kṣīṇā mayi kālena bhūyasā|

tatra yogena dṛṣṭena bhavānādātumarhati|| 8

अर्थ

अब अधिक समय हो जानेसे अवश्य ही वे धान्य मेरे उदरमें जीर्ण हो गये हैं; आप उन्हें पूर्वाचार्योंके बतलाये हुए उपायसे निकाल लीजिये॥ ८॥

टिप्पणियाँ

  1. ४

    प्रा० पा०—दृष्टेन योगेन।

    (मुद्रित पृष्ठ 493)

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